
रिपोर्ट: राहिल ख़ान
पंजाब के लुधियाना से सटे जगराओ के मल्ला गांव में एकता की अनोखी मिसाल देखने को मिली है. सिक्ख बहुल वाले इस गांव में मुहम्मद उस्मान एकलौते ऐसे मुस्लिम थे, जो अपने परिवार के साथ रहते थे. हर शुक्रवार जुम्मे की नमाज़ के लिए उन्हें गांव से 45 किलोमीटर दूर शहर आना पड़ता था. गांव में एक पुरानी मस्जिद थी, जो 1947 के दंगों के बाद जर्जर हो चुकी थी. मुहम्मद साहब की परेशानी को देखते हुए लोगों ने इस मस्जिद का जीर्णोधार करने का निर्णय किया. इसका निर्माण कार्य शुरू करने से पहले गांव के लोगों ने यहां एक लंगर का आयोजन किया, जो गांव की एकता का प्रतीक था. हम मल्ला गांव के सभी लोगों का तहे दिल से सलाम करते हैं, जो उन्होंने संप्रभुता और एकता की ऐसी मिसाल पेश की।