- बच्चा चोरी के इल्जाम में पिछले एक माह से जिला कारागार में थे निरुद्ध
- लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के प्रयास से मिली जमानत
संतकबीरनगर: जनपद में गठित लीगल एड डिफेंस काउंसिल की टीम निर्धन व बेसहारा लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। जिला कारागार में निरुद्ध ऐसे बंदी जिनका कोई पुरसाहाल नही है, ऐसे लोगों की पैरवी टीम के सदस्यों के द्वारा निःशुल्क व प्रभावी तरीके से करते हुए उनके चेहरे पर मुस्कान बिखरने का कार्य किया जा रहा है। सिस्टम के प्रयास से बच्चा चोरी के एक चर्चित मामले में विगत लगभग एक माह से जिला कारागार में निरुद्ध अति निर्धन व बेसहारा दंपत्ति की जमानत जनपद न्यायाधीश के कोर्ट से मंजूर हो चुकी है। मामले में कुल सात आरोपितों की गिरफ्तारी हुई थी।
लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चा चोरी के मामले में आरोपित छपरा बिहार वर्तमान पता विधियानी खलीलाबाद निवासी राजेश यादव की पत्नी संगीता के अनुसार वह गोरखल निवासिनी मोहिनी जायसवाल के घर नौकरानी का कार्य करती थी। मालकिन मोहिनी जायसवाल के एक रिश्तेदार सत्यप्रकाश जायसवाल की शादी 10-12 वर्ष पहले हुई थी। उनके कोई बच्चा नही हो रहा था। वह अपने नौकरानी से नवजात शिशु दिलाने की बात कहती थी। इसी बीच किसी बच्चे को गोद लेने की बात कहीं चल रही थी कि बेलहर कला थानाक्षेत्र में बीते 8 फरवरी को बच्चा चोरी करने का एक मामला अज्ञात पुरुष व अज्ञात महिला के खिलाफ दर्ज हुआ। मामले में मोहिनी जायसवाल व उनके पति चंदन जायसवाल तथा उनके रिश्तेदार सत्यप्रकाश तथा राजेश यादव व उनकी पत्नी संगीता समेत कुल सात आरोपितों की बीते 10 फरवरी को गिरफ्तारी हुई। मुकामी पुलिस द्वारा निर्धन व बेसहारा दंपति को मुख्य रुप से आरोपित किया गया। जिला कारागार में निरुद्ध अति निर्धन व असहाय राजेश यादव व उसकी पत्नी संगीता को छोड़कर सबकी तरफ से जमानत से संबंधित मामले की पैरवी चल रही थी। इसी बीच जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव व न्यायिक अधिकारी सुनील कुमार सिंह के निर्देशन में लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम की टीम जिला कारागार पहुंची। उनकी समस्या सुनकर जेल अधीक्षक के माध्यम से आवश्यक कागजात उपलब्ध होते ही दोनों असहाय आरोपित दंपति की तरफ से निःशुल्क व प्रभावी पैरवी चीफ अन्जय कुमार श्रीवास्तव के निर्देशन में डिप्टी लीगल एड डिफेंस काउंसिल संजीव कुमार पांडेय ने शुरु कर दिया। जनपद न्यायाधीश रणधीर सिंह ने अभियोजन व बचाव पक्ष के दलीलों को सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के उपरांत सभी सात आरोपितों की जमानत अर्जी स्वीकार कर जमानत पर रिहा करने का आदेश पारित किया है।