👉⭕सोशल ऑडिट टीम को फाइलों में मिला लाखों रुपये की गड़बड़ी।
👉⭕न पूर्ण अभिलेख मौजूद, न बिल बाउचर के मूल प्रति,न भौतिक सत्यापन में कार्यस्थलों पर शिलापट्ट फिर भी सोशल ऑडिट हुई सम्पन्न।

(14 सितंबर 2023)
संतकबीरनगर: शासन के निर्देशन में ग्राम पंचायत में वित्तिय वर्ष में किये गए कार्यो का सोशल ऑडिट टीम के द्वारा भौतिक सत्यापन, स्थलीय निरीक्षण, व ग्रामीणों के साथ खुली बैठक कर विकास कार्यों का सत्यापन कर शासन को रिपोर्ट सौंपा जा रहा है।जिसके क्रम में आज सोशल ऑडिट टीम द्वारा खलीलाबाद विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पानाराम में सोशल ऑडिट की बैठक आयोजित हुई।जिसमें सोशल ऑडिट टीम को पंचायत सेक्रेटरी तथा रोजगार सेवक की मिलीभगत से ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए कार्यों में ऑडिट टीम को कराए गए कार्यो में भारी गड़बड़ झाला नजर आया। ग्राम पंचायत पानाराम में मनरेगा द्वारा कराए गए कार्यों जैसे कच्चा और पक्का मिलकर कल लगभग 22 से 24 लाख रुपए का बजट खर्च हुआ है। लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा कराए गए कार्यों पर भौतिक स्थलीय सत्यापन के समय किसी भी कार्यस्थली पर बोर्ड नजर नहीं आया ना ही उसमें लगीं लागत मूल्य और कहां से कहां तक कार्य कराए गए हैं उसका पता भी नहीं लग पाया ।इतना ही नहीं रोजगार सेवक द्वारा कराए गए मनरेगा और पक्के कामों की फाइलों में अधूरे अभिलेख पाए गए जिसमें बिल वाउचर का मूल प्रति भी किसी भी फाइल में नजर नहीं आया ।मास्टर रोल के पहले ही फाइलों पर हस्ताक्षर कर लिए गए सोशल आडिट टीम को जिला मनरेगा सेल द्वारा आदेशित रहता है कि जहां सोशल ऑडिट हो रही हो वहां का ग्राम पंचायत सेक्रेटरी तथा टीए भी मौजूद रहे साथ ही साथ उनके अभिलेख पूरी तरह से कंप्लीट रहे जिससे एमआईएस रिपोर्ट से मिलान किया जा सके । लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि खलीलाबाद विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत पानाराम में न मौके पर टीए मिले ना ही ग्राम पंचायत अधिकारी, ना ही अभिलेखों में सम्मिलित बाउचर की मूल प्रतिको देखे गए । यहां तक की पंचायत में कराए गए कार्यों पर लगने वाले शिलापट्ट भी कही दिखाई नही पड़े।विकास कार्यों में इतनी अनियमितता के बाद भी अब देखना यह है कि सोशल ऑडिट करने गई टीम द्वारा विकास कार्यो की कितनी रिकवरी कराई जायेगी और जिला प्रशासन द्वारा धन को वापस करा कर शासन को प्रेषित किया जाएगा। फिलहाल सोशल ऑडिट टीम को ग्राम पंचायत पनाराम में ग्राम प्रधान,रोजगार सेवक द्वारा विशेष तौर पर ग्राम पंचायत अधिकारी की मिली भगत से सरकारी धन का बंदर बांट करते हुए सरकार के मनसा के अनुरूप कोई भी कार्य सही नहीं पाया गया।
रिपोर्ट: के के मिश्रा, नवनीत श्रीवास्तव