👉एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर करा दी गई सोशल ऑडिट

संतकबीरनगर 25 जुलाई 2023:जनपद में चल रहे सोशल ऑडिट का उड़ाया जा रहा है माखौल मौके पर सोशल ऑडिट टीम के ऑडिटर को ना तो कोई ग्राम पंचायत स्तर पर अभिलेख उपलब्ध कराए जा रहे हैं न ही ग्राम पंचायत अधिकारी अभिलेख लेकर मौके पर पहुंच रहे हैं मामला खलीलाबाद विकासखंड के ग्राम पंचायत अशरफाबाद का है जहां तकरीबन 35 लाख का पक्का काम व मनरेगा मजदूरी इंक्लूड कार्य कराया गया लेकिन ग्राम प्रधान के पास मौके पर कोई अभिलेख या पत्रावली उपलब्ध नहीं थी ऑडिटर के पूछने पर बताया गया कि समस्त पत्रावली ब्लॉक पर ग्राम पंचायत अधिकारी के पास है जिनमें कुछ कमियां थी जिसे सुधार किया जा रहा है ऐसी सूरत में सोशल ऑडिट के ऑडिटर द्वारा ग्रामीणों के बीच एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए कार्यों का सत्यापन कराया गया।सवाल इस बात का खड़ा होता है कि बिना किसी पत्रावली के एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर सोशल ऑडिट कराई कैसे गई। जबकि शासनादेश है कि मौके पर एमआईएस रिपोर्ट का मिलान ग्राम पंचायत स्तर पर रखी हुई पत्रावली या ग्राम पंचायत अधिकारी व वहां के टीए के सामने कराए जाएं लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है इसका खुला उल्लंघन ग्राम पंचायत अशरफाबाद में देखने को मिला जहां ऑडिटर द्वारा मजबूरन एमआईएस रिपोर्ट के आधार पर 25 से 50 लोगों के बीच ऑडिट कराकर अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौप दी गई।बताते चलें कि इस ग्राम पंचायत में लगभग 450 सक्रिय मनरेगा मजदूर हैं जिनमें से 162 लोगों का भुगतान कराया जा चुका है और बाकी लोगों के भुगतान अवशेष हैं प्रधानमंत्री आवास के तहत ग्राम पंचायत में 12 आवास प्राप्त हुए हैं जिनमें 10 पूर्ण पाए गए व दो अपूर्ण हैं बिना अभिलेख के जिले से चलने वाले सोशल ऑडिट करने वाले ऑडिटर गण अपने एमआईएस को मानते हुए उसी के आधार पर ग्रामीण से हामी भरते हुए करवा देते हैं। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए ऐसी सूरत में जिला प्रशासन क्यों न ऐसे ग्राम पंचायतों का रि ऑडिट कराने का आदेश निर्गत करें।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत अशरफाबाद के ग्राम पंचायत अधिकारी विपिन चंद्र बताए जाते हैं।