“प्रसिद्ध शाएर मस्ऊद हस्सास की यौमे पैदाइश पर विशेष”।
अज़ क़लम: मुहम्मद सलमान आरिफ नदवी
संतकबीरनगर

हमारे ख़ानदान, गाँव, ज़िला, स्टेट ही नहीं बल्कि पूरे हिन्दुस्तान का नाम रौशन करने वाले नौजवान साहबे दीवान शाएर मोहतरम मस्ऊद हस्सास Masood Hassaas को अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त लम्बी उम्र अता करे। दोनों जहान में सुर्ख़रूई नसीब करे।।
सफर सफर में बट गई, नगर नगर डगर गई।
किताबे ज़िन्दगी जो थी, वरक़ वरक़ बिखर गई।
(मस्ऊद हस्सास)
पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव परसादपुर संत कबीर नगर में रहने वाले मेरे छोटे नाना जान मरहूम जनाब हज़रत अली को क्या मालूम था कि मेरे इस कच्चे मकान में आँखे खोलने वाला यह नन्हा “मस्ऊद” सआदत व् शोहरत की इतनी मंज़िलें तय करेगा, कि जहाँ तक पहुँचते पहुँचते अक्सर राही थक जाया करते हैं। लेकिन ख़ुदा के लिए यह कुछ मुश्किल काम नहीं, वही तो है जो सीप से मोती, पत्थर से हीरा और मिट्टी से सोना निकालता है।
शुऊर व् फिक्र की बस्ती गुलाल करता है।
वही तो है जो यह कारे मुहाल करता है।
(मस्ऊद हस्सास)
मोहतरम मस्ऊद अहमद ने ज़िला संत कबीर नगर (बस्ती) तहसील ख़लीलाबाद, विकास खण्ड सेमरियावाँ के एक गाँव परसादपुर में आज ही के दिन 2 फरवरी सन 1975 ई• को आँखें खोलीं। आसपास गरीबी व् अशिक्षा का दौर दौरा था। ग्रामवासी दूर दराज़ मेहनत मज़दूरी कर दो जून की रोटी की व्यवस्था करते थे। ऐसे कठिन हालात में भी हज्जिन नानी ज़ुलैख़ा ख़ातून साहबा (अल्लाह लम्बी उम्र अता करे) ने हिम्मत न हारी। और दीगर बेटों की तरह प्यारे मस्ऊद को भी आला तालीम दिलाने में कोई कसर न छोड़ी। मस्ऊद साहब ने प्रारम्भिक शिक्षा मदरसा बैतुल उलूम व् मदरसा नूरुल इस्लाम महदेव में प्राप्त की। फिर आला तालीम के लिए मदरसा हुसैनिया ताउली तशरीफ ले गये। और सनदे फराग़त दारुल उलूम देवबन्द से हासिल की। तालीम मुकम्मल करने के बाद आप अजमल परफ्यूम्स मुम्बई में काम करने लगे। फिर दुबई की एक कम्पनी ख़ालिस परफ्यूम्स ने प्रतिभा पहचानते हुए दुबई में शोरूम इंचार्ज की हैसियत से आफर किया। इन की मेहनत, लगन व् ईमानदारी को देखते हुए कम्पनी ने आप को तरक़्क़ी देते हुए कुवैत भेजा। जहाँ आप अपने टैलेण्ट व् अनुभव की बदौलत मार्किटिंग मैनेजर की पोस्ट तक पहुँचे। और अब आप मुलाज़मत छोड़कर कुवैत में ही निजी बिज़नेस को विस्तार देने में मशगूल हैं।
इस जिस्म को झोंका है मशक़्क़त की अगन में।
हर लम्हा मरा मर के जिया जी के मरा हूँ।
तुम सोचते हो ऐश का बिस्तर है मुयस्सर।
मैं धूप के सहरा में थकन ओढ़ रहा हूँ।
(मस्ऊद हस्सास)
मस्ऊद साहब ने बचपन से ही शेर व् शाएरी करनी शुरू कर दी थी। यहां तक कि 17 वर्ष की आयु में ही आप ने वालिद साहब को एक मन्ज़ूम ख़त भेजा, यानी उस चिट्ठी में आप ने अपनी हाल चाल और पूरी बात चीत कविता के रूप में प्रस्तुत किया। क्योंकि:
पैवस्त दिल में हो गयी एक दीदा वर की बात।
क़ब्ल अज़ सफर ही रख़्ते सफर की बात।
हस्सास चन्द शेर ही देंगे तुझे दवाम।
रखेगा याद कौन तेरी उम्र भर की बात।
(मस्ऊद हस्सास)
(क़लम ज़िन्दा तहरीर बाक़ी)
इस मौक़े पर सभी ग्रामवासी व अहबाब आप के हक़ में दुआ गो हैं कि आप इसी तरह निरन्तर बुलंदी व् शोहरत के पथ पर अग्रसर रहते हुए क्षेत्र व् देश का नाम रौशन करते रहें।
जाना है मुझे औजे सुरय्या के मुक़ाबिल।
क़द तेरा मेरे यार घटाना भी नहीं है।
करना है बड़े शौक़ से मंज़िल का तआक़ुब।
जो राह का पत्थर है हटाना भी नहीं है।
(मस्ऊद हस्सास)
मुहम्मद सलमान आरिफ नदवी।
परसादपुर, सेमरियावाँ, संतकबीर नगर
9792761672