

संतकबीरनगर / कुरैश अहमद सिद्दीकी
संतकबीरनगर जिले समेत पूरे पूर्वांचल में शिक्षा की अलख जगाने वाले पूर्वांचल के मालवीय कहे गए पण्डित सूर्य नारायण चतुर्वेदी आज हम सबके बीच नही पर उनकी यादें, उनसे मिले प्रेम स्नेह और आशीर्वाद ने मेरी दुनिया ही बदल दी। आज जो कुछ भी मैं हूँ अथवा मैं आज जिस मुकाम पर हूँ उसमे सर्वाधिक योगदान आदरणीय दादा जी यानी पूर्वांचल के मालवीय पण्डित स्व0 सूर्य नारायण चतुर्वेदी जी का ही रहा। उक्त बातें जिले के सबसे बड़े ब्लॉक सेमरियावां के ब्लॉक प्रमुख मुमताज अहमद ने कही। श्री अहमद ने कहा कि आगामी 03अक्टूबर को उनकी दूसरी पुण्यतिथि के अवसर पर वो स्व0दादा जी को श्रद्धासुमन अर्पित करने भिठहाँ पर्वता गाँव जाएंगे। पुरानी यादों को ताजा करते हुए प्रमुख मुमताज़ अहमद ने बताया कि प्रमुखी के चुनाव में पहली बार मिली हार से जब वो निराशा में डूब चुके थे तब उनके सिर पर प्यार से हाथ फेरने वाले पूर्वांचल के मालवीय आदरणीय दादा जी ही थे। प्रमुख मुमताज़ अहमद ने स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि एक समय वो हर तरफ से निराश और परेशान होकर राजनीति को छोड़ दुबारा मुंबई सेटल होने के बारे में सोंच रहे थे और अपनी इसी व्यथा को जब उन्होंने दादा जी से बताया तो आदरणीय दादा जी ने उनके सिर पर अपनत्व का हाथ फेर उन्हें हौसला दिया और विषम परिस्थितियों से लड़ने की प्रेरणा दी। प्रमुख मुमताज अहमद ने कहा कि आदरणीय दादा जी उन्हें अपने बेटे की तरह मानते थे जिनकी कमी आजीवन खलती रहेगी।